रस्ता पर ओ भिख मांगिरहल
फाटल गुदरि मे लटपटायल
जाढ स कपकपाइत शरीर
थरथराइत हाथ आश स भरल
बिना बजोने जेना ओ बाजिरहल
आंखि स ऽ कहानि गाबिरहल
भुखले सुतल कतेको दिन सऽ
आंत मे आंत अछि ओकर सटल
भाबुक भऽ दु पाइ खसादेलौ
हर्षकऽ सिमा नहि रहलै ओकर
क्रितग्य भऽ मुसकियैत छल
नोर बहा धन्यबाद दैत रहल
आगा बढि मुडिकऽ जे देख्लौन
हजारो हाथ हुमरा दिस बढल
फाटल गुदरि मे सब कियो
लाचार भऽ किछु मांगिरहल
अतबे ज कियो कम त कियो बेसि
लाचारि आ बिबसता सऽ भरल
किछु नै किछु सब मांगिरहल
सब गोटे अछि भिखमंगे बनल
Saturday, 29 March 2008
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